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mahabharat 12.160.7: धर्म के सिद्धांतों को जानने वाले वृद्धजन कहते हैं कि संयम ही परम कल्याण का साधन है। विशेषकर ब्राह्मणों के लिए संयम ही सनातन धर्म है।   |   mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.160.7 
दमं नि:श्रेयसं प्राहुर्वृद्धा निश्चितदर्शिन:।
ब्राह्मणस्य विशेषेण दमो धर्म: सनातन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
धर्म के सिद्धांतों को जानने वाले वृद्धजन कहते हैं कि संयम ही परम कल्याण का साधन है। विशेषकर ब्राह्मणों के लिए संयम ही सनातन धर्म है।
 
Elders who know the principles of religion say that self-control is the means of ultimate welfare. Especially for Brahmins, self-control is the eternal religion. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)