Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.160.36: हे भारत! संयमी व्यक्ति को वन जाने की क्या आवश्यकता है? और जो अनुशासनहीन है, उसके लिए वन में रहने से क्या लाभ? संयमी व्यक्ति जहाँ भी रहता है, उसके लिए वन और आश्रम दोनों ही होते हैं। 36. | mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दान्तस्य किमरण्येन तथाऽदान्तस्य भारत।
यत्रैव निवसेद् दान्तस्तदरण्यं स चाश्रम:॥ ३६॥
अनुवाद
हे भारत! संयमी व्यक्ति को वन जाने की क्या आवश्यकता है? और जो अनुशासनहीन है, उसके लिए वन में रहने से क्या लाभ? संयमी व्यक्ति जहाँ भी रहता है, उसके लिए वन और आश्रम दोनों ही होते हैं। 36.
O Bharata! What is the need for a self-controlled person to go to the forest? And what is the benefit of living in the forest for the one who is undisciplined? Wherever a self-controlled person lives, there is a forest and an ashram for him. 36.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥