श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.160.3 
महानयं धर्मपथो बहुशाखश्च भारत।
किंस्विदेवेह धर्माणामनुष्ठेयतमं मतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भारत! यह धर्ममार्ग बहुत विशाल है। इससे अनेक शाखाएँ निकली हैं। इनमें से कौन-सा धर्म सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और उसका पालन करना चाहिए?
 
India! This path of religion is very vast. Many branches have emerged from it. Which of these religions is considered the best and must be followed?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)