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mahabharat 12.160.29: हे राजन! जो मनुष्य घर-परिवार का त्याग करके मोक्षमार्ग का आश्रय लेता है, वह अनंत वर्षों तक दिव्य तेजोमय लोक को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.160.29 
गृहानुत्सृज्य यो राजन् मोक्षमेवाभिपद्यते।
लोकास्तेजोमयास्तस्य कल्पन्ते शाश्वती: समा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य घर-परिवार का त्याग करके मोक्षमार्ग का आश्रय लेता है, वह अनंत वर्षों तक दिव्य तेजोमय लोक को प्राप्त करता है।
 
King! He who abandons his home and family and takes refuge in the path of salvation attains the divine radiant world for infinite years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)