श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.160.26 
अभयं यस्य भूतेभ्यो भूतानामभयं यत:।
तस्य देहाद् विमुक्तस्य भयं नास्ति कुतश्चन॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जिसे अन्य प्राणियों से कोई भय नहीं है और जिससे अन्य प्राणी भी नहीं डरते, उस देह के अहंकार से रहित महात्मा को कहीं से भी भय नहीं रहता ॥26॥
 
He who has no fear from other creatures and whom other creatures also do not fear, that great soul devoid of ego of the body, has no fear from anywhere. ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)