Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.160.25: ज्ञान से युक्त जितेन्द्रिय पुरुष घर छोड़कर वन में आश्रय लेता है, जहाँ वह निर्द्वन्द्व होकर मृत्युकाल की प्रतीक्षा करता हुआ विचरण करता है। इस प्रकार वह ब्रह्मभाव को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। 25॥ | mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्ञान से युक्त जितेन्द्रिय पुरुष घर छोड़कर वन में आश्रय लेता है, जहाँ वह निर्द्वन्द्व होकर मृत्युकाल की प्रतीक्षा करता हुआ विचरण करता है। इस प्रकार वह ब्रह्मभाव को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। 25॥
A person full of knowledge, Jitendriya, leaves his home and takes shelter in the forest, where he wanders without conflict, waiting for the time of death. In this way he becomes capable of attaining Brahmabhava. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥