Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.160.24: इस संसार में जो कुछ भी शुभ (कल्याणकारी) है और पुण्यात्मा पुरुषों द्वारा आचरण किया गया है, वही बुद्धिमान मुनि का मार्ग है। वह उसका स्वाभाविक रूप से आचरण करता है। वह उससे कभी विचलित नहीं होता॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्म यच्छुभमेवेह सद्भिराचरितं च यत्।
तदेव ज्ञानयुक्तस्य मुनेर्वर्त्म न हीयते॥ २४॥
अनुवाद
इस संसार में जो कुछ भी शुभ (कल्याणकारी) है और पुण्यात्मा पुरुषों द्वारा आचरण किया गया है, वही बुद्धिमान मुनि का मार्ग है। वह उसका स्वाभाविक रूप से आचरण करता है। वह उससे कभी विचलित नहीं होता॥ 24॥
In this world, whatever is only auspicious (welfare) and which has been practised by the virtuous men, is the path of the wise monk. He practises it naturally. He never deviates from it.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥