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mahabharat 12.160.23: जो विद्वान् पुरुष सदाचारी, सदाचारी, प्रसन्नचित्त और अपने स्वरूप को जानने वाला है, वह इस लोक में सम्मान पाकर परलोक में परम सिद्धि प्राप्त करता है ॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.160.23 
सुवृत्त: शीलसम्पन्न: प्रसन्नात्माऽऽत्मविद् बुध:।
प्राप्येह लोके सत्कारं सुगतिं प्रतिपद्यते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो विद्वान् पुरुष सदाचारी, सदाचारी, प्रसन्नचित्त और अपने स्वरूप को जानने वाला है, वह इस लोक में सम्मान पाकर परलोक में परम सिद्धि प्राप्त करता है ॥23॥
 
The learned man who is virtuous, well-mannered, happy-hearted and aware of his true nature, after getting respect in this world, attains ultimate success in the next world. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)