Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.160.21: जो ग्रामवासियों और वनवासियों के आचरणों में लिप्त नहीं होता तथा जो दूसरों की निन्दा या प्रशंसा से दूर रहता है, वह मोक्ष प्राप्त करता है ॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वाग्राम्यास्तथाऽऽरण्या याश्च लोके प्रवृत्तय:।
निन्दां चैव प्रशंसां च यो नाश्रयति मुच्यते॥ २१॥
अनुवाद
जो ग्रामवासियों और वनवासियों के आचरणों में लिप्त नहीं होता तथा जो दूसरों की निन्दा या प्रशंसा से दूर रहता है, वह मोक्ष प्राप्त करता है ॥ 21॥
One who does not indulge in the habits of villagers and forest dwellers and who also stays away from criticising or praising others, attains salvation. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥