सर्वाग्राम्यास्तथाऽऽरण्या याश्च लोके प्रवृत्तय:।
निन्दां चैव प्रशंसां च यो नाश्रयति मुच्यते॥ २१॥
अनुवाद
जो ग्रामवासियों और वनवासियों के आचरणों में लिप्त नहीं होता तथा जो दूसरों की निन्दा या प्रशंसा से दूर रहता है, वह मोक्ष प्राप्त करता है ॥ 21॥
One who does not indulge in the habits of villagers and forest dwellers and who also stays away from criticising or praising others, attains salvation. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)