श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.160.14 
आश्रमेषु चतुर्ष्वाहुर्दममेवोत्तमं व्रतम्।
तस्य लिङ्गानि वक्ष्यामि येषां समुदयो दम:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
चारों आश्रमों में संयम को सर्वश्रेष्ठ व्रत बताया गया है। अब मैं तुम्हें संयम और इन्द्रियों के संयम के उन लक्षणों के विषय में बताता हूँ, जिनके उदय होने को संयम कहते हैं॥14॥
 
In all the four ashramas, self-control has been described as the best vow. Now I will tell you about those symptoms of self-control and self-restraint of the senses, the emergence of which is called self-control.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)