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mahabharat 12.160.12: जिसने अपने मन और इन्द्रियों को वश में कर लिया है, वह सुख से सोता है, सुख से जागता है और सुख से संसार में विचरण करता है। उसका मन सदैव प्रसन्न रहता है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.160.12 
सुखं दान्त: प्रस्वपिति सुखं च प्रतिबुध्यते।
सुखं पर्येति लोकांश्च मनश्चास्य प्रसीदति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जिसने अपने मन और इन्द्रियों को वश में कर लिया है, वह सुख से सोता है, सुख से जागता है और सुख से संसार में विचरण करता है। उसका मन सदैव प्रसन्न रहता है॥12॥
 
He who has subdued his mind and senses sleeps comfortably, wakes up comfortably and moves about in the world comfortably. His mind is always happy.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)