Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.16.5-6: आप समस्त शास्त्रों के ज्ञाता और इस जगत के राजा होकर भी कायर पुरुष की भाँति विवशता के मोह में क्यों फँसे हुए हैं? जगत की गति और अगति दोनों का ज्ञान आपको है। हे प्रभु! आपसे न तो वर्तमान छिपा है और न ही भविष्य।॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 12.16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं हि राजा लोकस्य सर्वशास्त्रविशारद:।
मोहमापद्यसे दैन्याद् यथा कापुरुषस्तथा॥ ५॥
अगतिश्च गतिश्चैव लोकस्य विदिता तव।
आयत्यां च तदात्वे च न तेऽस्त्यविदितं प्रभो॥ ६॥
अनुवाद
आप समस्त शास्त्रों के ज्ञाता और इस जगत के राजा होकर भी कायर पुरुष की भाँति विवशता के मोह में क्यों फँसे हुए हैं? जगत की गति और अगति दोनों का ज्ञान आपको है। हे प्रभु! आपसे न तो वर्तमान छिपा है और न ही भविष्य।॥5-6॥
‘Being the knower of all the scriptures and the king of this world, why are you like a cowardly man, trapped in the illusion of helplessness? You have the knowledge of both the progress and non-movement of the world. Prabhu! Neither the present nor the future is hidden from you.॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥