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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.16.4 
भवत: सम्प्रमोहेन सर्वं संशयितं कृतम्।
विक्लवत्वं च न: प्राप्तमबलत्वं तथैव च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी इस आसक्ति के कारण सब कुछ संदिग्ध हो गया है। मेरा शरीर और मन अशांत और दुर्बल हो गए हैं।
 
‘Due to this attachment of yours, everything has become doubtful. My body and mind have become restless and weak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)