Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.16.2: राजन्! आप सभी धर्मों के ज्ञाता हैं। आपसे कुछ भी अज्ञात नहीं है। हम आपसे सदैव नीति की शिक्षा प्राप्त करते हैं। हम आपको शिक्षा नहीं दे सकते। ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.16.2 
राजन् विदितधर्मोऽसि न तेऽस्त्यविदितं क्वचित्।
उपशिक्षाम ते वृत्तं सदैव न च शक्नुम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजन्! आप सभी धर्मों के ज्ञाता हैं। आपसे कुछ भी अज्ञात नहीं है। हम आपसे सदैव नीति की शिक्षा प्राप्त करते हैं। हम आपको शिक्षा नहीं दे सकते। ॥2॥
 
‘King! You are the knower of all religions. Nothing is unknown to you. We always receive teachings of moral conduct from you. We cannot teach you. ॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)