Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.16.16-17: कुरु नन्दन! परंतु आप दुःखी होने पर दुःख को, सुखी होने पर सुख को, दुःखी होने पर सुख को और सुखी होने पर दुःख को याद नहीं करना चाहते; क्योंकि भाग्य बड़ा बलवान है। अथवा महाराज! आपका स्वभाव ही ऐसा है कि आप दुःख को सहते रहते हैं॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 12.16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स त्वं न दु:खी दु:खस्य न सुखी च सुखस्य वा।
न दु:खी सुखजातस्य न सुखी दु:खजस्य वा॥ १६॥
स्मर्तुमिच्छसि कौरव्य दिष्टं हि बलवत्तरम्।
अथवा ते स्वभावोऽयं येन पार्थिव क्लिश्यसे॥ १७॥
अनुवाद
कुरु नन्दन! परंतु आप दुःखी होने पर दुःख को, सुखी होने पर सुख को, दुःखी होने पर सुख को और सुखी होने पर दुःख को याद नहीं करना चाहते; क्योंकि भाग्य बड़ा बलवान है। अथवा महाराज! आपका स्वभाव ही ऐसा है कि आप दुःख को सहते रहते हैं॥16-17॥
‘Kuru Nandan! But you do not want to remember sorrow when you are sad, nor happiness when you are happy, nor happiness when you are sad, nor sadness when you are happy; because destiny is very strong. Or Maharaj! Your nature is such that you keep bearing the pain.॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥