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mahabharat 12.16.13: सत्व, रज और तम - ये तीन मानसिक गुण हैं। इन तीनों गुणों का संतुलित अवस्था में रहना मानसिक स्वास्थ्य का लक्षण कहा गया है।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.16.13 
सत्त्वं रजस्तम इति मानसा: स्युस्त्रयो गुणा:।
तेषां गुणानां साम्यं यत्तदाहु: स्वस्थलक्षणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सत्व, रज और तम - ये तीन मानसिक गुण हैं। इन तीनों गुणों का संतुलित अवस्था में रहना मानसिक स्वास्थ्य का लक्षण कहा गया है।॥13॥
 
‘Sattva, Raja and Tamas – these are the three mental qualities. The presence of these three qualities in a balanced state is said to be a sign of mental health.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)