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mahabharat 12.16.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! अर्जुन के वचन सुनकर अत्यन्त क्रोधित और तेजस्वी भीमसेन ने साहस बटोरकर अपने बड़े भाई से कहा - ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.16.1 
वैशम्पायन उवाच
अर्जुनस्य वच: श्रुत्वा भीमसेनोऽत्यमर्षण:।
धैर्यमास्थाय तेजस्वी ज्येष्ठं भ्रातरमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! अर्जुन के वचन सुनकर अत्यन्त क्रोधित और तेजस्वी भीमसेन ने साहस बटोरकर अपने बड़े भाई से कहा - ॥1॥
 
Vaishmpayana says: O King! On hearing Arjuna's words, the extremely angry and illustrious Bhimasena, gathering his courage, said to his elder brother:॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)