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mahabharat 12.159.9: हे भारत! हे पृथ्वी के स्वामी! अज्ञान और अति लोभ - इनको एक ही समझो, क्योंकि इनके फल और दोष एक ही हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.159.9 
उभावेतौ समफलौ समदोषौ च भारत।
अज्ञानं चातिलोभश्चाप्येकं जानीहि पार्थिव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! हे पृथ्वी के स्वामी! अज्ञान और अति लोभ - इनको एक ही समझो, क्योंकि इनके फल और दोष एक ही हैं॥9॥
 
Bharat! O Lord of the earth! Ignorance and extreme greed - consider them the same, because their results and faults are the same.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)