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mahabharat 12.159.6-7: भीष्म बोले - 'हे राजन! राग, द्वेष, मोह, हर्ष, शोक, मान, काम, क्रोध, मद, तन्द्रा, आलस्य, कामना, वैर, क्रोध, दूसरों की उन्नति देखकर ईर्ष्या करना और पाप करना - ये सब अज्ञान कहे गए हैं (क्योंकि ये अज्ञान के कार्य हैं)।   |   mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  12.159.6-7 
भीष्म उवाच
रागो द्वेषस्तथा मोहो हर्ष: शोकोऽभिमानिता।
काम: क्रोधश्च दर्पश्च तन्द्री चालस्यमेव च॥ ६॥
इच्छा द्वेषस्तथा ताप: परवृद्धॺुपतापिता।
अज्ञानमेतन्निर्दिष्टं पापानां चैव या: क्रिया:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - 'हे राजन! राग, द्वेष, मोह, हर्ष, शोक, मान, काम, क्रोध, मद, तन्द्रा, आलस्य, कामना, वैर, क्रोध, दूसरों की उन्नति देखकर ईर्ष्या करना और पाप करना - ये सब अज्ञान कहे गए हैं (क्योंकि ये अज्ञान के कार्य हैं)।
 
Bhishma said, 'O King! Passion, hatred, infatuation, joy, sorrow, pride, lust, anger, arrogance, drowsiness, laziness, desire, enmity, anger, jealousy on seeing others' progress and committing sins - all these are termed as ignorance (because they are the work of ignorance).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)