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mahabharat 12.159.4: युधिष्ठिर ने पूछा- हे राजन! अज्ञान की उत्पत्ति, स्थिति, वृद्धि, क्षय, उत्पत्ति, मूल, मात्रा, गति, काल, कारण और हेतु क्या है?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.159.4 
युधिष्ठिर उवाच
अज्ञानस्य प्रवृत्तिं च स्थानं वृद्धिक्षयोदयौ।
मूलं योगं गतिं कालं कारणं हेतुमेव च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- हे राजन! अज्ञान की उत्पत्ति, स्थिति, वृद्धि, क्षय, उत्पत्ति, मूल, मात्रा, गति, काल, कारण और हेतु क्या है?॥4॥
 
Yudhishthira asked- O King! What is the origin, condition, growth, decay, origin, root, quantity, speed, time, reason and cause of ignorance?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)