Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.159.2: भीष्म ने कहा, "युधिष्ठिर! जो मनुष्य अज्ञानतावश पाप करता है, उससे होने वाली हानि को नहीं समझता तथा सज्जनों से द्वेष करता है, वह संसार में बहुत निन्दित होता है।" 2. | mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
करोति पापं योऽज्ञानान्नात्मनो वेत्ति च क्षयम्।
प्रद्वेष्टि साधुवृत्तांश्च स लोकस्यैति वाच्यताम्॥ २॥
अनुवाद
भीष्म ने कहा, "युधिष्ठिर! जो मनुष्य अज्ञानतावश पाप करता है, उससे होने वाली हानि को नहीं समझता तथा सज्जनों से द्वेष करता है, वह संसार में बहुत निन्दित होता है।" 2.
Bhishma said, "Yudhishthira! A person who commits sins out of ignorance and does not understand the harm caused to him and hates noble men is greatly condemned in the world." 2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥