Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.159.14: हे कुरुश्रेष्ठ! तुम स्वयं इस दृश्यमान लोभ को त्यागने का प्रयत्न करो। लोभ को त्यागने से तुम्हें इस लोक में सुख मिलेगा और मृत्यु के पश्चात परलोक में भी सुखपूर्वक विचरण करोगे। 14॥ | mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुरुश्रेष्ठ! तुम स्वयं इस दृश्यमान लोभ को त्यागने का प्रयत्न करो। लोभ को त्यागने से तुम्हें इस लोक में सुख मिलेगा और मृत्यु के पश्चात परलोक में भी सुखपूर्वक विचरण करोगे। 14॥
Kurushrestha! You yourself should try to give up this visible greed. By renouncing greed, you will find happiness in this world and after death, you will roam happily in the next world also. 14॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि अज्ञानमाहात्म्ये एकोनषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें अज्ञानका माहात्म्यविषयक एक सौ उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥