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mahabharat 12.159.11: मोह ही निस्संदेह लोभ का मूल कारण है। यह कालरूपी मोहरूपी अज्ञान ही मनुष्य के दुर्भाग्य का कारण है। लोभ के नाश का कारण भी काल ही है। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.159.11 
मूलं लोभस्य मोहो वै कालात्मगतिरेव च।
छिन्ने भिन्ने तथा लोभे कारणं काल एव च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मोह ही निस्संदेह लोभ का मूल कारण है। यह कालरूपी मोहरूपी अज्ञान ही मनुष्य के दुर्भाग्य का कारण है। लोभ के नाश का कारण भी काल ही है। ॥11॥
 
Attachment is undoubtedly the root cause of greed. This time-like attachment-based ignorance is the cause of man's bad fate. Time is also the reason for the destruction of greed. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)