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mahabharat 12.159.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! आपने समस्त बुराइयों के मूल कारण लोभ का वर्णन किया है, अब कृपा करके अज्ञान का भी विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए; मैं उसका फल भी सुनना चाहता हूँ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.159.1 
युधिष्ठिर उवाच
अनर्थानामधिष्ठानमुक्तो लोभ: पितामह।
अज्ञानमपि वै तात श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! आपने समस्त बुराइयों के मूल कारण लोभ का वर्णन किया है, अब कृपा करके अज्ञान का भी विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए; मैं उसका फल भी सुनना चाहता हूँ॥1॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! You have described greed which is the root cause of all evils, now please describe ignorance in detail; I want to hear its consequences as well.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)