Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.158.5: असहिष्णुता, निर्लज्जता, संपत्ति का नाश, धर्म का क्षय, चिंता और अपयश - ये सब लोभ के कारण ही संभव हैं ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.158.5 
अक्षमा ह्रीपरित्याग: श्रीनाशो धर्मसंक्षय:।
अभिध्याप्रख्यता चैव सर्वं लोभात् प्रवर्तते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
असहिष्णुता, निर्लज्जता, संपत्ति का नाश, धर्म का क्षय, चिंता और अपयश - ये सब लोभ के कारण ही संभव हैं ॥5॥
 
Intolerance, shamelessness, destruction of property, decay of religion, worry and infamy - all these are possible only due to greed. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)