येष्वलोभस्तथामोहो ये च सत्यार्जवे स्थिता:।
तेषु कौन्तेय रज्येथा येषां न भ्रश्यते पुन:॥ ३२॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! तुम्हें उन पुरुषों से प्रेम करना चाहिए जो लोभ और मोह से रहित हैं, जो सत्य और सरलता में स्थित हैं और जो सदाचार से कभी विचलित नहीं होते ॥ 32॥
O son of Kunti! You should love those men who are devoid of greed and attachment, who are situated in truth and simplicity and who never deviate from good conduct. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)