Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.158.32: हे कुन्तीपुत्र! तुम्हें उन पुरुषों से प्रेम करना चाहिए जो लोभ और मोह से रहित हैं, जो सत्य और सरलता में स्थित हैं और जो सदाचार से कभी विचलित नहीं होते ॥ 32॥ | mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
येष्वलोभस्तथामोहो ये च सत्यार्जवे स्थिता:।
तेषु कौन्तेय रज्येथा येषां न भ्रश्यते पुन:॥ ३२॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! तुम्हें उन पुरुषों से प्रेम करना चाहिए जो लोभ और मोह से रहित हैं, जो सत्य और सरलता में स्थित हैं और जो सदाचार से कभी विचलित नहीं होते ॥ 32॥
O son of Kunti! You should love those men who are devoid of greed and attachment, who are situated in truth and simplicity and who never deviate from good conduct. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥