श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.158.3 
अत: पापमधर्मश्च यथा दु:खमनुत्तमम्।
निकृत्या मूलमेतद्धि येन पापकृतो जना:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
लोभ ही पाप, अधर्म और महान दुःख का कारण है। लोभ ही बेईमानी और छल का मूल कारण है। इसी के कारण लोग पापी बनते हैं।॥3॥
 
Greed is the cause of sin, wrongdoing and great suffering. Greed is the root cause of dishonesty and deceit. It is because of this that people become sinners.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)