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mahabharat 12.158.29: जो काम और क्रोध से रहित हैं, आसक्ति और अहंकार से रहित हैं, उत्तम व्रतों का पालन करते हैं और धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं, उन महापुरुषों की संगति करो और उनसे अपने संशय पूछो॥ 29॥   |   mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.158.29 
कामक्रोधव्यपेता ये निर्ममा निरहंकृता:।
सुव्रता: स्थिरमर्यादास्तानुपास्व च पृच्छ च॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो काम और क्रोध से रहित हैं, आसक्ति और अहंकार से रहित हैं, उत्तम व्रतों का पालन करते हैं और धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं, उन महापुरुषों की संगति करो और उनसे अपने संशय पूछो॥ 29॥
 
Associate with those great men who are devoid of lust and anger, who are devoid of attachment and ego, who follow the best vows and who uphold the limits of religion, and ask them about your doubts.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)