Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.158.28: वे किसी से नहीं डरते, वे चंचल नहीं हैं, उनका स्वभाव किसी के लिए भी भयभीत करने वाला नहीं है, वे सदैव सन्मार्ग पर ही रहते हैं, उनमें सदैव अहिंसा प्रतिष्ठित रहती है, ऐसे महापुरुषों का सदैव अनुसरण करना चाहिए ॥28॥ | mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न त्रासिनो न चपला न रौद्रा: सत्पथे स्थिता:।
ते सेव्या: साधुभिर्नित्यं येष्वहिंसा प्रतिष्ठिता॥ २८॥
अनुवाद
वे किसी से नहीं डरते, वे चंचल नहीं हैं, उनका स्वभाव किसी के लिए भी भयभीत करने वाला नहीं है, वे सदैव सन्मार्ग पर ही रहते हैं, उनमें सदैव अहिंसा प्रतिष्ठित रहती है, ऐसे महापुरुषों का सदैव अनुसरण करना चाहिए ॥28॥
They do not fear anyone, they are not fickle, their nature is not fearful for anyone, they always remain on the right path, non-violence is always established in them, such great men should always be followed. ॥28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥