Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.158.27: वे सत्कर्मों से विचलित नहीं हो सकते। वे सदैव धर्म के पालन में तत्पर रहते हैं। वे उसी आचार-संहिता का पालन करते हैं जिसका पालन पूर्वकाल के महापुरुष करते थे। उनकी आचार-संहिता कभी नष्ट नहीं होती।॥27॥ | mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ते चालयितुं शक्या धर्मव्यापारकारिण:।
न तेषां भिद्यते वृत्तं यत्पुरा साधुभि: कृतम्॥ २७॥
अनुवाद
वे सत्कर्मों से विचलित नहीं हो सकते। वे सदैव धर्म के पालन में तत्पर रहते हैं। वे उसी आचार-संहिता का पालन करते हैं जिसका पालन पूर्वकाल के महापुरुष करते थे। उनकी आचार-संहिता कभी नष्ट नहीं होती।॥27॥
They cannot be distracted from good deeds. They are always devoted to performing Dharma. They follow the same code of conduct that was followed by the great men of the past. Their code of conduct never gets destroyed.॥27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥