Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.158.25: वे देते हैं, लेते नहीं। वे स्वभावतः करुणा से भरे होते हैं। वे देवताओं, पितरों और अतिथियों के सेवक होते हैं और सदा शुभ कर्म करने को तत्पर रहते हैं। 25. | mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दातारो न ग्रहीतारो दयावन्तस्तथैव च।
पितृदेवातिथेयाश्च नित्योद्युक्तास्तथैव च॥ २५॥
अनुवाद
वे देते हैं, लेते नहीं। वे स्वभावतः करुणा से भरे होते हैं। वे देवताओं, पितरों और अतिथियों के सेवक होते हैं और सदा शुभ कर्म करने को तत्पर रहते हैं। 25.
They give, they do not take. They are naturally full of compassion. They are the servants of the gods, ancestors and guests and are always ready to do good deeds. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥