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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण
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श्लोक 24
श्लोक
12.158.24
शिष्टाचार: प्रियो येषु दमो येषु प्रतिष्ठित:।
सुखं दु:खं समं येषां सत्यं येषां परायणम्॥ २४॥
अनुवाद
जो शिष्टाचार से प्रेम करते हैं। जो आत्मसंयम रखते हैं। जिनके लिए सुख-दुःख समान हैं। जिनका परम आश्रय सत्य है।॥24॥
Those who love etiquette. Those who have self-control. Those for whom happiness and sorrow are the same. Those whose ultimate refuge is truth.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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