Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.158.23: जिन्हें इस संसार में पुनः जन्म लेने का भय नहीं है, जिन्हें परलोक का भय नहीं है, जिन्हें सांसारिक सुखों में आसक्ति नहीं है, तथा जिन्हें प्रिय-अप्रिय में रुचि या अरुचि नहीं है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
येष्वावृत्तिभयं नास्ति परलोकभयं न च।
नामिषेषु प्रसंगोऽस्ति न प्रियेष्वप्रियेषु च॥ २३॥
अनुवाद
जिन्हें इस संसार में पुनः जन्म लेने का भय नहीं है, जिन्हें परलोक का भय नहीं है, जिन्हें सांसारिक सुखों में आसक्ति नहीं है, तथा जिन्हें प्रिय-अप्रिय में रुचि या अरुचि नहीं है ॥23॥
Those who have no fear of being born again in this world, who have no fear of the next world, who have no attachment to worldly pleasures, and who have no likes or dislikes for the pleasant and the unpleasant. ॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥