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mahabharat 12.158.22: जो लोग सदैव लोभ में डूबे रहते हैं, उन्हें तुम्हें असभ्य समझना चाहिए। तुम्हें अपनी शंकाएँ विनम्र लोगों से ही पूछनी चाहिए। मैं उन विनम्र लोगों का परिचय दे रहा हूँ जो पवित्र नियमों का पालन करते हैं॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.158.22 
एतानशिष्टान् बुध्यस्व नित्यं लोभसमन्वितान्।
शिष्टांस्तु परिपृच्छेथा यान् वक्ष्यामि शुचिव्रतान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो लोग सदैव लोभ में डूबे रहते हैं, उन्हें तुम्हें असभ्य समझना चाहिए। तुम्हें अपनी शंकाएँ विनम्र लोगों से ही पूछनी चाहिए। मैं उन विनम्र लोगों का परिचय दे रहा हूँ जो पवित्र नियमों का पालन करते हैं॥ 22॥
 
You should consider such people who are always immersed in greed as rude. You should ask your doubts to the polite people only. I am introducing those polite people who follow the sacred rules.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)