श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.158.2 
भीष्म उवाच
पापस्य यदधिष्ठानं तच्छृणुष्व नराधिप।
एको लोभो महाग्राहो लोभात् पापं प्रवर्तते॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "नरेश्वर! पाप का आधार सुनो। लोभ ही पाप का आधार है। वह एक बड़ा मगरमच्छ है जो मनुष्य को निगल जाता है। लोभ ही पाप का कारण है।"
 
Bhishma said, "Nareshwar! Listen to the foundation of sin. Greed alone is the foundation of sin. It is a big crocodile that swallows a man. Greed is the reason for sin. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)