श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  12.158.16-17h 
सुमहान्त्यपि शास्त्राणि धारयन्ति बहुश्रुता:॥ १६॥
छेत्तार: संशयानां च क्लिश्यन्तीहाल्पबुद्धय:।
 
 
अनुवाद
विद्वान् पुरुष प्रमुख शास्त्रों को कंठस्थ करके सबके संशय दूर करते हैं; परन्तु इस लोभ में फँसकर उनकी बुद्धि नष्ट हो जाती है और वे दुःख भोगते रहते हैं॥16 1/2॥
 
The learned men memorise the major scriptures and clear everyone's doubts; but being trapped in this greed, their wisdom is destroyed and they continue to suffer.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)