श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.157.8 
एवं हि राजशार्दूल दुर्बल: सन् बलीयसा।
वैरमारभते बालस्तप्यते शाल्मलिर्यथा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! इसी प्रकार जो मूर्ख मनुष्य स्वयं दुर्बल होकर बलवान से शत्रुता करता है, वह रेशम के वृक्ष के समान दुःख भोगता है॥8॥
 
O best of kings! Similarly, a foolish person who being weak himself develops enmity with a strong person, is destined to suffer the same pain as the silk cotton tree. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)