श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.157.7 
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो वायो: शाल्मलिर्व्रीडितस्तदा।
अतप्यत वच: स्मृत्वा नारदो यत् तदाब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! वायुदेव के ये वचन सुनकर रेशमी कपास का वृक्ष लज्जित हो गया और नारदजी की कही हुई बात याद करके बहुत पश्चाताप करने लगा।
 
Bhishma says - King! On hearing these words of Vayu, the silk cotton tree felt ashamed and remembering what Narada had said, it began to repent a lot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)