vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान्के साथ वैर न करनेका उपदेश
»
श्लोक 3
श्लोक
12.157.3
तत: क्रुद्ध: श्वसन् वायु: पातयन् वै महाद्रुमान्।
आजगामाथ तं देशमास्ते यत्र स शाल्मलि:॥ ३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् जब प्रातःकाल हुआ, तब वायुदेव क्रोधित होकर बड़े-बड़े वृक्षों को नष्ट करते हुए उस स्थान पर आए जहाँ सेमलका वृक्ष था॥3॥
After that, when morning came, Vayudev got angry and came to the place where the Semalka tree was, destroying big trees. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×