श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.157.3 
तत: क्रुद्ध: श्वसन् वायु: पातयन् वै महाद्रुमान्।
आजगामाथ तं देशमास्ते यत्र स शाल्मलि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब प्रातःकाल हुआ, तब वायुदेव क्रोधित होकर बड़े-बड़े वृक्षों को नष्ट करते हुए उस स्थान पर आए जहाँ सेमलका वृक्ष था॥3॥
 
After that, when morning came, Vayudev got angry and came to the place where the Semalka tree was, destroying big trees. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)