श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.157.2 
स परित्यज्य शाखाश्च पत्राणि कुसुमानि च।
प्रभाते वायुमायान्तं प्रत्यैक्षत वनस्पति:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस पौधे ने अपनी शाखाएं, पत्तियां और फूल त्याग दिए और सुबह की हवा आने का इंतजार करने लगा। 2.
 
That plant abandoned its branches, leaves and flowers and waited for the morning breeze to come. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)