श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.157.16 
उक्ताश्च ते राजधर्मा आपद्धर्माश्च भारत।
विस्तरेण महाराज किं भूय: श्रोतुमिच्छसि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! महाराज! मैंने आपको राजा के कर्तव्य और आपातकालीन कर्तव्य के बारे में विस्तार से बताया है। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?
 
O Bharatanandan! Maharaj! I have explained to you in detail about the king's duty and the emergency duty. What else do you wish to hear? 16.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि पवनशाल्मलिसंवादे सप्तपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें पवन-शाल्मलिसंवादविषयक एक सौ सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)