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उक्ताश्च ते राजधर्मा आपद्धर्माश्च भारत।
विस्तरेण महाराज किं भूय: श्रोतुमिच्छसि॥ १६॥
अनुवाद
हे भरतनन्दन! महाराज! मैंने आपको राजा के कर्तव्य और आपातकालीन कर्तव्य के बारे में विस्तार से बताया है। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?
O Bharatanandan! Maharaj! I have explained to you in detail about the king's duty and the emergency duty. What else do you wish to hear? 16.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि पवनशाल्मलिसंवादे सप्तपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें पवन-शाल्मलिसंवादविषयक एक सौ सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥