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mahabharat 12.157.13: हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! इसलिए बालक, मूर्ख, अंधे, बहरे तथा अपने से अधिक बलवान के भी बुरे आचरण को आपको क्षमा कर देना चाहिए; यह क्षमाभाव आपके भीतर विद्यमान है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.157.13 
तस्मात् क्षमेत बालाय जडान्धबधिराय च।
बलाधिकाय राजेन्द्र तद् दृष्टं त्वयि शत्रुहन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले राजन! इसलिए बालक, मूर्ख, अंधे, बहरे तथा अपने से अधिक बलवान के भी बुरे आचरण को आपको क्षमा कर देना चाहिए; यह क्षमाभाव आपके भीतर विद्यमान है॥13॥
 
O King, destroyer of enemies! Therefore, you should forgive even the bad behaviour of a child, an idiot, a blind, a deaf and someone who is stronger than you; this feeling of forgiveness is present within you.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)