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mahabharat 12.157.11: दुष्ट बुद्धि वाले मनुष्य को बुद्धिमान व्यक्ति से वैर नहीं करना चाहिए; क्योंकि बुद्धिमान की बुद्धि घास पर फैलने वाली आग की तरह सर्वत्र फैलती है। 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.157.11 
वैरं न कुर्वीत नरो दुर्बुद्धिर्बुद्धिजीविना।
बुद्धिर्बुद्धिमतो याति तृणेष्विव हुताशन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट बुद्धि वाले मनुष्य को बुद्धिमान व्यक्ति से वैर नहीं करना चाहिए; क्योंकि बुद्धिमान की बुद्धि घास पर फैलने वाली आग की तरह सर्वत्र फैलती है। 11॥
 
A person with an evil mind should not have enmity with an intelligent person; Because the wisdom of the wise reaches everywhere like fire spreading across the grass. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)