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mahabharat 12.157.10: महाराज! महान विचारों वाला व्यक्ति अपने प्रति बुरा करने वालों के प्रति शत्रुता नहीं दिखाता। वह अपनी शक्ति धीरे-धीरे और स्थिर रूप से दिखाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.157.10 
न हि वैरं महात्मानो विवृण्वन्त्यपकारिषु।
शनै: शनैर्महाराज दर्शयन्ति स्म ते बलम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! महान विचारों वाला व्यक्ति अपने प्रति बुरा करने वालों के प्रति शत्रुता नहीं दिखाता। वह अपनी शक्ति धीरे-धीरे और स्थिर रूप से दिखाता है।
 
Maharaj! A man with great thoughts does not show hostility towards those who do evil to him. He shows his strength slowly and steadily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)