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mahabharat 12.157.1: भीष्म बोले - हे राजन! ऐसा मन में विचार करके सेमल व्याकुल हो गया और उसने अपनी शाखाएँ, टहनियाँ और डालियाँ स्वयं ही गिरा दीं।   |   mahabharat अध्याय 12.157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 157: सेमलका हार स्वीकार करना तथा बलवान‍्के साथ वैर न करनेका उपदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.157.1 
भीष्म उवाच
ततो निश्चित्य मनसा शाल्मलि: क्षुभितस्तदा।
शाखा: स्कन्धान् प्रशाखाश्च स्वयमेव व्यशातयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - हे राजन! ऐसा मन में विचार करके सेमल व्याकुल हो गया और उसने अपनी शाखाएँ, टहनियाँ और डालियाँ स्वयं ही गिरा दीं।
 
Bhishma said - O King! Having thought this in his mind, the Semla became agitated and dropped her branches, twigs and branches on her own.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)