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mahabharat 12.156.7: हे वृक्ष! मैं तुम्हें बहुत अच्छी तरह जानता हूँ। मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ जानता हूँ। ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना करते समय तुम्हारी छाया में विश्राम किया था। 7.   |   mahabharat अध्याय 12.156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.156.7 
अहं त्वामभिजानामि विदितश्चासि मे द्रुम।
पितामह: प्रजासर्गे त्वयि विश्रान्तवान् प्रभु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे वृक्ष! मैं तुम्हें बहुत अच्छी तरह जानता हूँ। मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ जानता हूँ। ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना करते समय तुम्हारी छाया में विश्राम किया था। 7.
 
Tree! I know you very well. I know everything about you. Lord Brahma rested in your shade while creating the people. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)