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श्लोक 12.156.5  |
भीष्म उवाच
एतत् तु वचनं श्रुत्वा नारदस्य समीरण:।
शाल्मलिं तमुपागम्य क्रुद्धो वचनमब्रवीत्॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्म कहते हैं - राजन! नारदजी के ये वचन सुनकर वायुदेव शाल्मली के पास गए और क्रोधित होकर बोले। |
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| Bhishma says - King! On hearing these words of Naradji, Vayudev went to Shalmali and said in anger. |
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