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mahabharat 12.156.4: हे वायुदेव! मैं आपको जानता हूँ। आप समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ, महान् और यशस्वी हैं तथा क्रोध में वैवस्वत यम के समान हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.156.4 
जानामि त्वामहं वायो सर्वप्राणभृतां वरम्।
वरिष्ठं च गरिष्ठं च क्रोधे वैवस्वतं यथा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे वायुदेव! मैं आपको जानता हूँ। आप समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ, महान् और यशस्वी हैं तथा क्रोध में वैवस्वत यम के समान हैं॥4॥
 
Wind God! I know you. You are the best, great and glorious among all living beings and are like Vaivaswat Yama in anger. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)