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mahabharat 12.156.3: उसने आपके प्रति बहुत से आपत्तिजनक वचन कहे हैं, जिन्हें आपके सामने कहना मेरे लिए उचित नहीं है ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.156.3 
बहुव्याक्षेपयुक्तानि त्वामाह वचनानि स:।
न युक्तानि मया वायो तानि वक्तुं तवाग्रत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उसने आपके प्रति बहुत से आपत्तिजनक वचन कहे हैं, जिन्हें आपके सामने कहना मेरे लिए उचित नहीं है ॥3॥
 
He has said many objectionable words towards you, which it is not appropriate for me to say in your presence. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)