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mahabharat 12.156.19: परन्तु वे मूर्ख हैं, इसलिए नहीं जानते कि वायुदेव क्रोध करके उन्हें किस प्रकार दबाते हैं। मैं यह सब अच्छी तरह जानता हूँ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 156: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.156.19 
ते तु बाला न जानन्ति यथा वै तान् समीरण:।
समीरयति संक्रुद्धो यथा जानाम्यहं तथा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वे मूर्ख हैं, इसलिए नहीं जानते कि वायुदेव क्रोध करके उन्हें किस प्रकार दबाते हैं। मैं यह सब अच्छी तरह जानता हूँ॥19॥
 
‘But they are fools; therefore they do not know the manner in which the wind-god suppresses them in anger. I know all this very well.'॥ 19॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि पवनशाल्मलिसंवादे षट्पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें पवन-शाल्मलि-संवादविषयक एक सौ छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)